22 मई को शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या पर पत्नी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं

shani jayanti
  • सूर्य पुत्र हैं शनि, शनि जयंती पर करें तेल का दान और शनि मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें

शुक्रवार, 22 मई 2020 को कृत्तिका नक्षत्र में शनि जयंती मनाई जाएगी। शनि, सूर्य और छाया के पुत्र हैं। उनके भाई यमराज और बहन यमुना हैं। शनि का रंग काला है और वे नीले वस्त्र धारण करते हैं। ज्येष मास की अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाती है। इसी तिथि पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए वट यानी बरगद की पूजा करती हैं। ये परंपरा पुराने समय से चली आ रही है।

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उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि के जन्म के संबंध में संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार सूर्यदेव का विवाह दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। इसके बाद यमराज और यमुना का जन्म हुआ। संज्ञा सूर्य के तेज का सामना नहीं कर पा रही थीं। इस कारण संज्ञा ने अपनी छाया को सूर्य की सेवा में नियुक्त कर दिया। कुछ समय बाद छाया ने सूर्य पुत्र शनि को जन्म दिया। उस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि थी। छाया पुत्र होने की वजह से इनका वर्ण श्याम है।

शनि जयंती पर शनि की साढ़ेसाती-ढय्या के अशुभ से बचने के लिए तेल का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में तेल चढ़ाएं। हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनि के मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें।

वट अमावस्या महिलाओं के लिए है खास तिथि
22 मई को ज्येष्ठ माह की अमावस्या है। इस तिथि पर सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस दिन महिलाएं पूरा श्रृंगार करती हैं। निर्जला व्रत रखती हैं और पति के सौभाग्य के लिए व्रत-उपवास करती हैं। वट-वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती है।