रिलायंस रिटेल में $1 अरब का निवेश करेगी जीआईसी, टीपीजी

शुक्रवार देर शाम रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जानकारी दी कि दौ और वैश्विक फंड कंपनी की रिटेल इकाई रिलायंस रिटेल के साथ जुड़ने वाले हैं. सिंगापुर का जीआईसी और अमेरिका का टीपीजी मिलकर करीब $1 अरब (7,350) करोड़ रुपये में कंपनी की 1.6 इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने वाली है. आइए जानिए Aaj Ka Panchang.

जीआईसी 5,512 करोड़ रुपये का निवेश कर रिलायंस रिटेल वेंचर्स की 1.22 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने वाली है, जबकि टीपीजी कैपिटल एशिया फंड 1,837 करोड़ रुपये में 0.41 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने वाला है. इसके बिक्री के लिए रिलायंल रिटेल वेंचर्स की ..

बीते तीन सप्ताह के कई दिग्गज वैश्विक फंडों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिेटेल इकाई में तगड़ा निवेश किया है. मुकेश अंबानी ने 36,200 करोड़ रुपये में देश की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी की 7.3 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है.

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एक महीने से भी कम समय में मध्य पूर्व से लेकर अमेरिका तक के करीब आधा दर्जन फंडों ने रिलायंस रिटेल में निवेश किया है, जिसमें सिल्वर लेक, केकेआर, जनरल एटलांटिक और मुबादला जैसे नाम शामिल हैं. रिलायंस रिटेल देश भर में 12,000 स्टोर्स का परिचालन करती है.

हाल ही में कपनी ने अमेजन और वॉलमार्ट को टक्कर देने के लिए अपने ई-कॉमर्स पोर्टल जियोमार्ट को लॉन्च किया है. गुरुवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जानकारी दी कि अबू धाबी का सॉवरेन फंड मुबादला इंवेस्टमेंट कॉर्प रिलायंस रिटेल में 6,247 करोड़ रुपये में 1.4 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने वाला है.

रिलायंस ने इस वित्त वर्ष की शुरुआत में अपनी डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म की 33 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 1.52 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे. इसमें गूगल, फेसबुक और क्वालकॉम जैसे टेक दिग्गजों के साथ कई वैश्विक फंड भी शामिल थे. अब वहीं वैश्विक फंड इसकी रिटेल इकाई में भी भरोसा जता रहे हैं.

गौरतलब है कि सिंगापुर सीआईसी ने सिर्फ रिलायंस रिटेल में ही निवेश किया है और इसके पास जियो प्लेटफॉर्म की हिस्सेदारी नहीं है. जीआईसी के अलावा बाकी सभी निवेशकों के पास जियो प्लेटफॉर्म की भी हिस्सेदारी है. Reach out to the best Astrologer at Jyotirvid.

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो प्लेटफॉर्म के सभी निवेशकों को रिलायंस रिटेल में निवेश का ऑफर दिया था, जिसके जरिए कंपनी ने 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 60,000-63,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था.

इंटेल और क्वालकॉम ने रिटेल कारोबार में निवेश करने से मना कर दिया, जबकि फेसबुक और गूगल की तरफ से कोई पुख्ता जवाब नहीं आया है. वैश्विक फंडों के पास रिलायंस रिटेल में निवेश करने की अपनी वजह है क्योंकि उनका मानना है कि भारत का रिटेल बाजार अगले एक दशक में $800 अरब को हो सकता है.

भारत अगले पांच साल में $5 लाख करोड़ को अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख रहा है, जो अभी $3 लाख करोड़ से भी कम है. भारत में रिटेल इंडस्ट्री से अर्थव्यवस्था की एक-चौथाई हिस्सेदारी आती है.

कुछ सप्ताह पहले ही रिलायंस रिटेल ने देश की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी फ्यूचर ग्रुप का अधिग्रहण किया था. कंपनी ने 26,000 करोड़ रुपये का इस कारोबार को खरीदा, जिससे इसकी बिक्री 1.89 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकती है. रिलायंस रेवेन्यू के मामले एवेन्यू सुपरमार्ट्स की तुलना में सात गुना बड़़ी इकाई है. और अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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