दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर यहां, इसलिए ढलता सूरज करता है प्रणाम

क्या आपने कभी ऐसा देखा है कि दो धर्मों के लोग एक ही धार्मिक स्थल को अपना-अपना मानते हों? ऐसा सुखद संयोग अंकोरवाट मंदिर में देखने को मिलता है। यह मंदिर कंबोडिया में स्थित है। अंकोरवाट अपनी स्थापना के समय से हिंदू धर्म को समर्पित मंदिर रहा और फिर यह बौद्ध मंदिर बना दिया गया। लेकिन आज भी हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायी समान रूप से मंदिर में आस्था रखते हैं। आइए, जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें…

दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
अंकोरवाट मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। यह भी एक अजब संयोग है कि हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल अब हिंदुस्तान में नहीं है! कंबोडिया में स्थित यह मंदिर खमेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय द्वारा 12 वीं शताब्दी में खमेर साम्राज्य की राजधानी यशोधरापुरा में बनाया गया था। जानकारी के अनुसार यह मंदिर 402 एकड़ भूमि पर बनाया गया है।

यहां आते हैं सबसे अधिक पर्यटक
यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक होने के साथ ही दुनिया में सबसे अधिक सैलानियों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करनेवाला धार्मिक स्थल भी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मंदिर के दर्शनों के लिए हर साल 50% अंतरराष्ट्रीय पर्यटक कंबोडिया आते हैं।

राष्ट्र ध्वज पर चित्रत विरासत
अंगकोरवाट के मंदिर का फोटो राष्ट्रीय ध्वज पर चित्रित किया गया है। खास बात यह है कि कंबोडिया के अलावा केवल अफगानिस्तान का वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज ही ऐसा है, जिस पर राष्ट्रीय स्मारक को चित्रित किया गया है। एक समय में कंबोडिया का नाम कंपूचिया था और यह शक्तिशाली हिंदू और बौद्ध धर्म के साम्राज्य के लिए जाना जाता था। यहां के खमेर साम्राज्य का पूरे एशिया में वर्चस्व था।

खमेर की वास्तुकला
खमेर वास्तुकला की शास्त्रीय शैली का सबसे अच्छा और समृद्ध परिचय अंकोरवाट मंदिर कराता है। इस मंदिर को मेरू पर्वत का रूप देते हुए बनाया गया है। हिंदू धर्म में मेरू पर्वत को भगवान ब्रह्मा सहित अनेक देवताओं का निवास स्थान माना जाता है।

अन्य मंदिरों से इसलिए है अलग
इस मंदिर की अनेक विशेषताएं हैं, जो जिसे दूसरे मंदिरों से अलग करती हैं। उनमें एक विशेषता यह भी शामिल है कि इस मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में स्थित है। जबकि सभी प्रमुख हिंदू तीर्थों और मंदिरों के द्वार पूर्व दिशा में स्थित होता हैं। यह मंदिर सूर्यास्त के समय सूर्यदेव को नमन करता हुआ प्रतीत होता है और ढलते सूरज की रोशनी इसकी सुंदरता को कई गुना तक बढ़ा देती है।

विश्व विरासत है यह मंदिर
यूनेस्को ने सन् 1992 में हिंदू और बौद्ध धर्म की इस धरोहर अंकोरवाट को विश्व विरासत स्थल घोषित किया। सूत्रों के मुताबिक इस मंदिर के दर्शनों के लिए हर साल लगभग 2 मिलियन लोग आते हैं।

पूर्वजों से अलग
जानकारी के अनुसार, खमेर वंश के राजा शैव संप्रदाय के अनुयायी थे। अर्थात वे भगवान शिव के भक्त थे। लेकिन अपने पूर्वजों से इतर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर की दीवारों पर अनेक धार्मिक और पौराणिक कहानियों को चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से उकेरा गया है।