गणेश चतुर्थी पर बन रहे है शुभ संयोग, इस संयोग से आपके जीवन में होगाी धन व समृद्धि…

इस शुभ योग में होंगी सभी मनोकामनाएं पूरी

सनातन धर्म में कोई भी शुभ कार्य जब होता है तो सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। क्योंकि वही प्रथम पूजनीय देवता हैं। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व बहुत धुमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 22 अगस्त दिन शनिवार को है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस बार गणेश चतुर्थी पर रवि योग, सिद्धिदा योग और गजकेसरी योग के साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषी मानते हैं कि ये शुभ संयोग धन समृद्धि दायक हैं। इन संयोग में विघ्नहर्ता गणेशजी की पूजा करने से ना सिर्फ सभी समस्याओं का अंत होता है बल्कि घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी पर बन रहे इन शुभ संयोग के बारे में…

नहीं आती किसी काम में अड़चन

गणेश चतुर्थी पर रवि योग शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषों के अनुसार, यह योग बहुत प्रभावशाली है, यह योग कई अशुभ योगों के प्रभाव को दूर करने वाला माना जाता है। इस योग में किए जाने वाले शुभ कार्य सफल होते हैं। भगवान गणेश को भी विघ्नहर्ता बताया गया है। जब इस योग में भगवान गणेशी की पूजा करेंगे तो पूजा का फल जल्दी मिलेगा, मनोकामना पूर्ण करने नें गणेशजी भी सहायक रहेंगे। इस योग में कोई नया काम भी शुरू कर सकते हैं।

होंगे सभी कार्य शुभ

गणेश चतुर्थी के दिन हस्त नक्षत्र भी बन रहा है। शनिवार के दिन यह योग होना मृत्युकारी योग माना गया है। कहते हैं इस योग कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाना चाहिए। लेकिन गणेशजी खुद विघ्नों को नाश करने वाले हैं इसलिए इस योग का नकारात्मक असर खत्म हो जाता है। इसके साथ ही शनिवार को चतुर्थी तिथि लगी है। चतुर्थी तिथि को शास्त्रों में रिक्ता तिथि कहा गया है। रिक्ता तिथि में भी कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है लेकिन शनिवार के दिन इस तिथि के पड़ जाने से हस्त नक्षत्र और रिक्ता तिथि के भी अशुभ प्रभाव दूर हो जाते हैं। क्योंकि शनिवार को चतुर्थी तिथि के होने से सिद्धिदा योग बन जाता है। इससे इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाएंगे उसके शुभ फल प्राप्त होंगे।

शनिदोष से मिलेगी मुक्ति

गणेश चतुर्थी शनिवार के दिन पड़ रही है इसलिए जो जातक शनि दोष से पीड़ित हैं, उनको शनि गणपति की पूजा करनी चाहिए। इस दिन गणपति को लाल फूल के साथ नीले रंग के भी फूल भी अर्पित करें, यह शनि दोष को दूर करने में सहायक होगा। इसके साथ ही पीपल के पेड़ की पूजा करना भी फायदेमंद माना गया है।

धन व समृद्धि दायक है यह योग

गणेश चतुर्थी पर गजकेसरी योग भी बन रहा है। जब चंद्रमा और बृहस्पति एक दूसरे से केंद्र में होते हैं तो यह धन समृद्धिदायक योग बनता है। इस बार 22 अगस्त गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा कन्या राशि में होंगे और गुरु अपनी राशि धनु में रहेंगे। इससे ज्योतिषशास्त्र में वर्णित यह शुभ योग निर्मित होगा, जिसके शुभ फल को स्वयं गणेशजी प्रदान करते हैं। धन समृद्धि की इच्छा रखने वाले गृहस्थों को इस शुभ योग में गणपति को प्रसन्न करना चाहिए और ऋण मोचन गणेश स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here