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गले के दर्द, इंफेक्शन को खत्म करेंगे ये आयुर्वेदिक उपाय, स्वामी रामदेव से जानिए टॉन्सिल का इलाज

ठंड के मौसम में अधिकतर लोगों को गले में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते खाने और पीने में भी काफी समस्या होती है। आमतौर पर गले और फिर कानों में होने वाले दर्द को जुकाम की समस्या मानते हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह टॉन्सिल हो सकता है। जिसके कारण गले में दर्द, छाले, बोलने में परेशानी, गर्दन और जबड़े में सूजन आदि की समस्या हो जाती है। अगर इसका इलाज समय में कर लिया जाए तो कई बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है। आइए जानिए मांगलिक दोष

स्वामी रामदेव के अनुसार गले में इंफेक्शन की समस्या अधिकतर लोगों को हो जाती है। इसमें योग, प्राणायाम के साथ-साथ आयुर्वेदिक उपाय अपना सकते हैं। जानिए इन उपायों के बारे में।

टॉन्सिल क्या है?

हर किसी के गले में टॉन्सिल होते हैं। एक दाईं तरफ और दूसरी बाईं तरफ। टॉन्सिल का काम जर्म्स से लड़ना होता है, जो मुंह या नाक से हमारे शरीर में धुस जाते हैं। लेकिन कभी-कभी ये बैक्टीरिया या वायरस टॉन्सिल में घुस जाते हैं और उन्हें इंफेक्ट कर देते हैं। टॉन्सिलाइटिस की परेशानी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके साथ ही 5 से 15 साल के बीच स्ट्रेप थ्रोट की परेशानी होती है।

टॉन्सिल के लक्षण

गले में तेज दर्द होना
निगलने में कठिनाई होना
कान के निचले भाग में दर्द रहना
जबड़ों के निचले हिस्से में सूजन
गले में खराश महसूस होना
कमजोरी, थकान और चिड़चिड़ापन होना
छोटे बच्चों में सांस लेने में तकलीफ

टॉन्सिल की समस्या से निजात पाने के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय

कपूर को सुंघने से भी टॉन्सिल में लाभ मिलेगा।
बहेड़ा, बबूल की छाल, त्रिकुटा, हल्दी और सेंधा नमक को पानी में डालकर मिक्स कर लें। इससे गरारा करे। इससे टॉन्सिल की समस्या से लाभ मिलेगा।
हल्दी, अदरक, लहसुन, प्याज का पेस्ट बनाकर गले में लगाकर ऊपर से कपड़ा बांध दें। इससे भी लाभ मिलेगा।
लक्ष्मी विलास, संजीवनी, त्रिकटू, बबूल की छाल, बहेड़ा का पाउडर बनाक

सौंठ, पीपल, काली मिर्च को समान मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। यह त्रिकटु बना लें। इसके साथ ही इसमें अर्जुन की छाल, बहेड़ा डालकर पाउडर बना लें। रोजाना 2-2 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ चाट लें।
खाने में चने की रोटी खाएं। गेंहू आदि की रोटी न खाएं।
उबली सब्जियों में काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर खाएं।
श्वासारि, त्रिकटु, सितोपलादि 20 ग्राम और अभ्रक भस्म 5 ग्राम, गोदंती 10 ग्राम और स्वर्ण वसंत 2-3 ग्राम को बराबर मात्रा में मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। इसका रोजाना सेवन करे।
खजूर और द्राक्ष का सेवन करे।
केसर के 10-15 धागे ले लें।
अंगूठे में राख लगाकर गले के अंदर टॉन्सिल में लगा लें। इससे लाभ मिलेगा।

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