तुलसी बढ़ाती है इम्युनिटी लेकिन इस दिन पत्तों को तोड़ना और खाना हानिकारक

इसलिए हिंदू धर्म में पूजनीय गुणकारी तुलसी

तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है, इसे देवी लक्ष्मी के समान ही सुखदायी और कल्याणकारी कह गया है। पुराणों में बताया गया है कि तुलसी इतनी पवित्र है कि भगवान विष्णु इन्हें अपने सिर पर स्थान देते हैं। बिना तुलसी पत्ता के भगवान प्रसाद भी ग्रहण नहीं करते हैं। तुलसी का यह महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह आरोग्य प्रदायिनी है।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए तुलसी कारगर

पुराणों में कहा गया है कि जिन घरों में तुलसी होती है और जहां लोग नियमित प्रातः काल तुलसी के दर्शन करते हैं वह देवी लक्ष्मी की कृपा पा जाते हैं। ऐसे लोगों के घर में लक्ष्मी का वास होता है। पुराणों में ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि तुलसी अपने आस-पास के वातावरण को पवित्र कर देती जिससे नकारात्मक नहीं रहती है और लोग कम बीमार होता है। स्वास्थ्य को उत्तम धन कहा गया है क्योंकि जहां निरोग काया होती है वहां समृद्धि बनी रहती है। इस समय कोरोना से जंग में आयुष मंत्रालय भी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए तुलसी सेवन की सलाह दे रहा है। आइए जानें तुलसी से जुड़ी कुछ खास बातें।

तुलसी की मंजरी का महत्व

स्कंद पुराण में बताया गया है – तुलसी यस्य भवने प्रत्यहं परिपूज्यते। तद्गृहं नोपसर्पन्ति कदाचित् यमकिंकराः।। यानी जिन घरों में तुलसी का पौधा हो और नियमित पूजा होती है वहां पर यमराज का प्रवेश नहीं होता है। यानी ऐसे घर में लोग कम बीमार होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि तुलसी के पत्तों के साथ तुलसी की मंजरी का भी बड़ा महत्व है। तुलसी की मंजरियों से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं।

तुलसी मंजरी के फायदे

तुलसी की मंजरी जो भक्त नियमित भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि तुलसी के ऊपर मंजरी आ जाए तो उसे तोड़कर भगवान को चढ़ाने से तुलसी भी प्रसन्न होती है। तुलसी पर मंजरी होने से तुलसी देवी दुखी रहती हैं। इनका विकास नहीं हो पाता है इसलिए इसे हटा देना जरूरी होता है।

आरोग्य की होती है वृद्धि

तुलसी की जड़ को दूध से सींचने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। जबकि तुलसी की माटी का तिलक लगाने से आरोग्य और तेज की वृद्धि होती है ऐसा शास्त्रों में बताया गया है। तुलसी का पत्ता वात, पित्त और कफ त्रिदोष का नाश करता है इसलिए इसे इम्युनिटी बढाने वाला माना गया है।

इस दिन ना तोड़ें तुलसी के पत्ते

तुलसी के पत्ते कभी भी रविवार को नहीं तोड़ना चाहिए। तुलसी पत्ते को एकादशी को भी नहीं तोड़ना चाहिए। जिस व्यक्ति ने एकादशी का व्रत किया है उसे द्वादशी के दिन भी तुलसी पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। साथ ही तुलसी के साथ दूध कभी नहीं लेना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। एक खास बात यह है कि तुलसी का पत्ता 7 दिनों तक बासी नहीं होता है। वैसे ताजा पत्ता नहीं होने पर गंगाजल से धोकर इसे कभी भी प्रयोग किया जा सकता है।