होम अरोमा के लिए वास्तु टिप्स: इसलिए सुहाग की सेज सजाने में गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है

पूजा से लेकर सुहाग की सेज तक सुगंध का महत्व

मानव सभ्‍यता में आदिकाल से आस-पास के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए विभिन्‍न प्रकार की सुगंधों का प्रयोग होता आ रहा है। वास्‍तु विज्ञान में भी इसे विशेष स्‍थान दिया गया है। वास्‍तु विज्ञान में सुंगध के प्रयोग से घर के माहौल को खुशनुमा बनाने के कई तरीके बताए गए हैं। इस मामले में प्रकृति ने भी हमें अनमोल खजाना दिया है। सुगंधित पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियां, फल-फूल सब कुछ तो हमारे आस-पास ही है। प्राचीन काल में राजा-महाराजाओं के यहां भी विभिन्‍न प्रकार की सुगंधियों का प्रयोग करके महल, वस्‍त्रों, विभिन्‍न कक्षों, दरबार व अन्‍य सभी स्‍थानों को महकाने का कार्य किया जाता था। आइए आपको बताते हैं कि किस खुशबू का प्रयोग घर में किस स्‍थान पर करना चाहिए और इसका क्या लाभ होता है।

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विवाह योग्य कन्याओं के लिए यह सुगंध उत्तम

गेंदा, पियूनिया या अन्य पीले फूलों को विवाह योग्य कन्याओं के कक्ष के सामने सजाने से उनके विवाह के अच्‍छे प्रस्ताव आते हैं ऐसी मान्यता है। गेंदे के फूलों का प्रयोग भगवान विष्णु की पूजा में भी विशेष तौर पर किया जाता है। इसका संबंध गुरु ग्रह से भी है जो कन्याओं के विवाह और दांपत्य सुख के कारक माने जाते हैं। विवाह योग्य कन्याओं को नियमित इस फूल से नारायण की पूजा करनी चाहिए और सिरहाने रखकर सोना चाहिए।विवाह का योग प्रबल होता है।

वैवाहिक जीवन को बनाना चाहते हैं रोमांटिक तो

गुलाब की भीनी-भीनी खुशबू आपके घर को प्‍यार से महका देगी। अमन, शांति व प्रेम का प्रतीक गुलाब अपनी मादक सुगंध से नकारात्मकता को दूर करता है। यह व्यवहार में मिठास घोलता है एवं अपनेपन का अहसास दिलाता है। एक बात का ध्यान रखें कि गुलाब के फूल आप घर में जहां पर भी लगाएं, लेकिन इन्‍हें समय-समय पर बदलते रहें। गुलाब के फूल का प्रयोग लक्ष्‍मी माता और दुर्गा माता की पूजा में भी किया जाता है। इस फूल का संबंध शुक्र ग्रह से माना गया है। शुक्र को वैवाहिक जीवन और सेक्स लाइफ को प्रभावित करने वाला ग्रह कहा गया है। इसलिए सुहाग की सेज को गुलाबों की पंखुड़ियों से सजाया जाता है।

घर की नकारात्‍मकता को दूर करती है यह खुशबू

घर में विभिन्‍न प्रकार के सुगंधों के इस्‍तेमाल से आप नकारात्‍मकता को दूर करके घर की ऊर्जा में भी वृद्धि कर सकते हैं। आप चाहें तो पूजाघर में भगवान को रोजाना इत्र चढ़ाएं इससे वातावरण भी सुगंधित होगा और घर की नकारात्‍मकता भी जाएगी। पूजा में इत्र के प्रयोग को पुराणों में बहुत ही उपयोगी बताया गया है।

व्‍यावसायिक भवनों में ऐसी खुशबुओं का प्रयोग

वास्‍तु विज्ञान के अनुसार आप अपने कार्यस्‍थल के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए भी सुगंधों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। अगर आपके व्‍यापार में नुकसान ज्‍यादा हो रहा है तो आप हानिकारक ऊर्जा के मार्ग को बदलकर उसके स्‍थान पर सकारात्मक ऊर्जा को प्राप्‍त करने के लिए सुगंधों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप चंदन और गुलाब की अगरबत्तियों को सुबह-शाम जलाएं। घर के अंदर देसी घी के दीये जलाने से भी सात्विक व नैसर्गिक ऊर्जा मिलती है, जो वहां रहने वालों के लिए अनूठी होती है।

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सुबह की पूजा में न करें इनका प्रयोग

सुबह की पूजा में मोगरे की खुशबू वाली अगरबत्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इनके प्रयोग से आपके शरीर में मादकता बढ़ती है। इसलिए दुल्‍हन के गजरे में मोगरे के फूल लगाए जाते हैं। सुबह के वक्‍त इनकी खुशबू सूंघने से आपको आलस्‍य का अनुभव होने लगेगा। इससे आपकी आराम करने की तीव्र इच्‍छा होने लगेगी। इसके अलावा किसी ऐसे भवन या फिर औद्योगिक इकाई में भी ऐसी खुशबुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए, जहां कई सारे लोग एक साथ मशीन पर काम करते हों। शाम के वक्‍त की पूजा में इनका प्रयोग किया जा सकता है। नवविवाहित दंपती रात को सोने से पहले अपने कमरे में इन्हें रखकर मादकता बढ़ा सकते हैं।

घर में कोई रहता हो डिप्रेशन में तो

आपके घर में कोई सदस्य यदि किसी कारणवश तनाव या डिप्रेशन अनुभव करते हों, तो घर में हर हफ्ते में कम से कम एक बार हवन सामग्री को जलाने व घर के सभी हिस्सों में धूनी देने से राहत मिलती है। हवन सामग्री के विकल्प के रूप में लोबान या गुग्गल का उपयोग किया जा सकता है। घर में यदि कोई जगह ऐसी हो, जहां धूप न पहुंचती हो तो उस स्‍थान को कपूर की टिकिया रखकर सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण किया जा सकता है।