आज करें श्री गणेश के महामंत्र का जाप, मिलेगा हर संकट से छुटकारा

प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत करने का विधान है और आज शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है। लिहाजा  वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत किया जायेगा। हमारी संस्कृति में भगवान श्री गणेश जी को प्रथम पूजनीय देवता का दर्जा दिया गया है। किसी भी देवी-देवता की पूजा से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा का ही विधान है और आज तो स्वयं गणपति जी का दिन है। श्री गणेश को चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता माना गया है। साथ ही इन्हें बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। गणेश जी की उपासना शीघ्र फलदायी मानी गयी है और आज के दिन गणेश जी के निमित्त व्रत करने से व्यक्ति की समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है। साथ ही हर तरह के संकटों से छुटकारा मिलता है, ज्ञान की प्राप्ति होती है और धन-संपत्ति में भी बढ़ोतरी होती है। 

 श्री गणेश के अत्यंत महत्वपूर्ण छः अक्षर के मंत्र को सिद्ध करने की विधि बतायेंगे। मंत्र है-‘वक्रतुण्डाय हुम्’

आज चतुर्थी तिथि के दौरान शुभ मुहूर्त में घर के किसी एकांत जगह पर जप स्थान निर्धारित करके वहां आसन लगाकर पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाये फिर भगवान गणेश के मूलमंत्र से आचमन तथा प्राणायाम करके भूतशुद्धि, प्राणप्रतिष्ठा, अंतमातृका, बहिमातृका न्यास सर्वदेवोपयोगि- पद्धति से करके पूर्ववत गणेशकलामातृका न्यास करके प्रयोगोक्त न्यास आदि करना चाहिए। न्यास के क्रम है-
ऋष्यादिन्यास-
ॐ भार्गवर्ष्ये नमः शिरिसि।
ॐ अनुष्टुप्छन्दसे नमः मुखे।
ॐ विघ्नेशदेवतायै नमः हृदि।
ॐ बं बीजाय नमः गुह्ये।
ॐ यं शक्तये नमः पादयोः।
ॐ विनियोगाय नमः सर्वाग्ड़े।

इसके बाद-
करन्यास-

ॐ नं नमः अंगुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ क्रं नमः तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ तुं नमः मध्यमाभ्यां।
ॐ डां नमः अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ यं नमः कनिष्ठीकाभ्यां नमः।
ॐ हुं नमः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।