अजब मंदिर गजब देवता, मच्छर, चमगादड़, मेंढक की होती है यहां पूजा

दुनिया के अजीबोगरीब मंदिर

चमगादड़ से कोरोना वायरस फैलने बात जब से सामने आई है तब से लोग चमगादड़ को नफरत भरी नजरों से देखने लगे हैं। हाल ही में मुंबई स्थित अमिताभ बच्‍चन के घर जलसा में कहीं से चमगादड़ उड़कर आ गई तो बिगबी ने घबराकर ट्वीट किया, ‘हे भगवान ऐसा मेरे घर में पहली बार हुआ है’। मगर क्‍या आप जानते हैं कि दुनिया के कई स्‍थानों पर इन्‍हीं चमगादड़ों की पूजा होती है। चमगादड़ ही नहीं बल्कि मेंढक, सांप, चूहे और मच्‍छरों का भी मंदिर है। इन मंदिरों में इनकी पूजा देवताओं के रूप में होती है। आइए जानते हैं दुनिया में कहां स्थित हैं ऐसे अजीबोगरीब मंदिर…

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बेट केव (चमगादड़ की गुफा) बाली

बाली में बेट केव यानी चमगादड़ों की गुफा है। यहां के स्‍थानीय लोग बताते हैं इस गुफा के नीचे एक नदी बहती है, जिसके पानी में घाव सही कर देने की भी क्षमता है। यहां चमगादड़ों को शुभ माना जाता है। यहां पर हजारों की संख्‍या में चमगादड़ रहते हैं और यहां पर्यटक चमगादड़ों को देखने दूर-दूर से आते हैं। यहां चमगादड़ दिन में सोते हैं और रात में उड़कर इधर-उधर चले जाते हैं।

मच्‍छरों का मंदिर

आंध्र प्रदेश में एक डॉक्‍टर ने मच्‍छरों का मंदिर बनवाया है। इसमें खास बात यह है कि डॉक्‍टर ने यह मंदिर मच्‍छरों की पूजा के लिए नहीं बल्कि मच्‍छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बनवाया है। हैदराबाद के ग्रामीण इलाके में डॉक्‍टर एम सतीश कुमार ने यह मंदिर वर्ष 2008 में यह मंदिर 5000 रुपये की लागत से बनवाया है।

मेंढक का मंदिर

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज‍िले के ओयल में भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मेंढक की पूजा की जाती है। बताया जाता है कि यह मंदिर मांडूक तंत्र पर आधारित है और शिवजी मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं। करीब 200 साल पुराने इस मेंढक मंदिर का निर्माण सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए करवाया गया था। मेंढक मंद‍िर के श‍िवल‍िंग की खास बात यह है कि इस श‍िवल‍िंग का रंग बदलता है। यहां खड़ी नंदी की मूर्ति है, जो आपको कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगी।

यहां चमगादड़ों की होती है पूजा

दुनियाभर में चमगादड़ों की तुलना निशाचर या वैम्पायर से करते हैं और इनको अशुभ मानते हैं। केरल में कुछ समय पहले चमगादड़ों से निपाह वायरस फैला था, जिससे कई लोगों की मौत हो गई थी। इस समय कोरोना वायरस के फैलने की वजह भी चमगादड़ को मानते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में कुछ ऐसे भी गांव हैं, जहां लोग चमगादड़ों की पूजा करते हैं। यहां लोगों का ऐसा विश्वास है कि ये ग्राम देवता की तरह हैं जो यहां के लोगों की रक्षा करते हैं और आने वाली विपत्ति एवं महामारी से बचाव करते हैं।

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बिहार के मंदिर में चमगादड़ों की पूजा बिहार के वैशाली जिले में एक ऐसा मंदिर हैं जहां लोग चमगादड़ों की पूजा करते हैं और इन्हें ग्राम देवता के रूप में मानते हैं। यहां के निवासी चमगादड़ों को संपन्नता का प्रतीक मानते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि जहां चमगादड़ निवास करते हैं, वहां कभी भी धन की कमी नहीं होती है। पटना और मुजफ्फरपुर के बीच में वैशाली जिला आता है जहां के राजापाकड़ प्रखंड के सरसई (रामपुर रत्नाकर) गांव में हजारों की संख्या में चमगादड़ों का बसेरा है। यह गांव इन चमगादड़ों के कारण प्रसिद्धि पा चुका है। यहां चमगादड़ों को देखने के लिए काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। गांव के लोगों का मानना है कि चमगादड़ उनके पूरे गांव की रक्षा करते हैं।

यहां चूहे लगाते हैं भोग

राजस्थान के बीकानेर में करणी माता का मंदिर स्थित है। यह मंदिर को चूहों वाली माता के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भक्तों को जो प्रसाद दिया जाता है दरअसल वह चूहों द्वारा जूठा किया गया होता है। मान्यता है कि यहां पर रहने वाले चूहें माता की संतान हैं।