जानें बेल पत्र को तोड़ने और भगवान शिव पर अर्पित करने का सही तरीका

मान्यता के अनुसार तुलसी माता लक्ष्मी का रूप है और मां लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं. इसी वजह से तुलसी को अन्य भगवान पर अर्पित करना वर्जित माना गया है. पौराणिक कथा के अनुसार सब जालंधर नाम के राक्षस से परेशान थे. परंतु उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता था. क्योंकि उसकी पतिव्रता पत्नी वृंदा के तप जुड़ी थी. तब भगवान विष्णु ने छल से वृंदा के पति का रूप धारण कर तप भ्रष्ट कर दिया और भगवान शिव ने जालंधर का वध किया. तभी से तुलसी ने स्वयं भगवान शिव के पूजन सामग्री में न शामिल होने की बात कही थी.

हिंदू धर्म में भगवान भोलेनाथ अत्यंत लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं. सोमवार को भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना की जाती है. उनको प्रसन्न करने के लिए सोमवार (Monday) का व्रत रखा जाता है. इस व्रत में विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है. जिसमें भगवान शिव की प्रिय सामग्री उन्हें अर्पित करने का विधान है. भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय बेल पत्र है जिसे संस्कृत में बिल्वपत्र भी कहा जाता है. भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करने से उन्हें शीतलता प्राप्त होती है. सनातन धर्म में प्रकृति (Nature) के प्रति कृतज्ञता और स्नेह की भावना सर्वोपरि है. इसीलिए शास्त्रों में फूल पत्तियों को तोड़ने के कुछ नियम उल्लेखित हैं. ऐसे ही बेल पत्र को तोड़ने का भगवान शिव को अर्पित करने का क्या नियम है आइए जानते हैं.

मान्यता है कि बेल पत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है. पूजा में इनका प्रयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं. भगवान शि‍व को बेल पत्र अर्पित करने और इसे तोड़ने के कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है.

भगवान शिव को बेल पत्र अत्यंत प्रिय है, इसलिए इन तिथ‍ियों या वार से पहले तोड़ी गई बेल पत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है.

बेल पत्र को लेकर शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि यदि नया बेल पत्र न मिले, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेल पत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है.

शाम होने के बाद बेल पत्र क्या किसी भी वृक्ष को हाथ नहीं लगाना चाहिए.

टहनी से एक-एक कर बेल पत्र ही तोड़ना चाहिए. पूरी टहनी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए.

बेल पत्र तोड़ने से पहले और तोड़ने के बाद मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए.

इस तरह चढ़ाएं शिवलिंग पर बेल पत्र

भगवान शिव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए. बेल पत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

बेल पत्र में वज्र और चक्र नहीं होना चाहिए.

बेल पत्र 3 से 11 पत्ती वाले होते हैं. इसमें जितने अधिक पत्र होते हैं भगवान शिव को अर्पित करने का उतना ही अधिक लाभ प्राप्त होता है.

यदि बेलपत्र ना मिल पाएं को बेल के वृक्ष के दर्शन करना ही पाप-ताप को नष्ट कर देता है.

शिवलिंग पर चढ़ाए दूसरे के बेल पत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए.

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स्रोतindia.news18.com
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