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भगवान विष्णु के पास कहां से आया था सुदर्शन चक्र? पढ़ें, पौराणिक कथा

हम सभी ने भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और उनके अस्त्र-शास्त्रों के बारे में कहीं न कहीं पढ़ा, सुना या देखा ज़रुर है. उन्ही में से एक अस्त्र, जिसको हम सभी काफी अच्छी तरह से पहचानते हैं. वो है भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र (Sudarshan Chakra). पौराणिक हिन्दू कथाओं में सुदर्शन चक्र के बारे में अलग-अलग जगह अलग कथाएं मिलती हैं. अस्त्र एक ऐसा हथियार होता है जो छोटा और अचूक माना जाता है.

हिन्दू धर्म में सभी देवी-देवताओं के अपने अलग-अलग अस्त्र हैं. सुदर्शन चक्र का नाम भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण (Lord Krishna) के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है. क्या आपको पता है कि यह सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु के पास कहां से आया? पौराणिक हिन्दू कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल महाभारत में किया था. पुराणों की मानें तो सुदर्शन एक ऐसा अचूक अस्त्र था जिसे छोड़ने के बाद वो अपने लक्ष्य का पीछा करता था और उसे ख़त्म करने के बाद वापस अपने छोड़े गए स्थान पर आ जाता था.

पुराणों के अनुसार

पुराणों के अनुसार सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शंकर ने किया था, और इसे बाद में भगवान विष्णु को सौंप दिया. ज़रुरत पड़ने पर भगवान विष्णु ने इस चक्र को देवी पार्वती को प्रदान किया. शिव महापुराण में इससे जुड़ी एक कथा का वर्णन मिलता है, पृथ्वी पर जब दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया और दानव जब स्वर्ग लोक तक पहुंच गए, तब सभी देवता घबराकर भगवान विष्णु के पास गए, दानवों को परास्त करने के लिए एक दिव्य अस्त्र की ज़रुरत थी. तब भगवान विष्णु ने कैलाश पर जाकर भगवान शंकर की आराधना शुरू की. भगवान विष्णु ने हजार नामों से भोलेनाथ की स्तुति करी और प्रत्येक नाम के साथ एक कमल का फूल भोलेनाथ को अर्पित करते गए. तब भोलेनाथ ने भगवान विष्णु की परीक्षा लेने के लिए उन हजार कमल के पुष्पों में से एक पुष्प को छिपा दिया.

शिव की माया के कारण भगवान विष्णु को यह बात पता नहीं चली और जब उन्हें एक पुष्प नहीं मिला तो उन्होंने भोलेनाथ को पुष्प की जगह अपनी एक आँख अर्पित कर दी. भगवान श्री हरी की भक्ति देखकर भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट होकर उनसे वरदान मांगने को कहा. तब श्री हरी ने दैत्यों के संहार के लिए भोलेनाथ से एक अजेय अस्त्र मांगा. भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर खुद के द्वारा बनाया हुआ सुदर्शन चक्र भगवन श्री हरी विष्णु को भेंट किया. श्री हरी ने यह चक्र धारण किया और कई बार देवताओं को इस चक्र की सहायता से दैत्यों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई.

सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु के स्वरुप के साथ सदैव के लिए जुड़ गया. इसके बाद श्री हरी ने यह चक्र आवश्यकता पड़ने पर माता पार्वती को प्रदान किया. माता पार्वती से यह चक्र कई देवी-देवताओं से होता हुआ भगवान परशुराम के पास पहुंचा और भगवान परशुराम से यह चक्र श्री कृष्ण के पास आ गया. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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