जानें राशि के अनुसार कौन सा रुद्राक्ष होगा आपके लिए बेहतर, मिलेगा कई बीमारियों से निजात

रुद्राक्ष

रुद्राक्ष भगवान शिव का रूप है। मनुष्यों को अपने पापों से निवृत्ति के लिये भगवान शिव ने इन दिव्य दानों का वरदान दिया। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष धारण करते साथ ही व्यक्ति को महादेव का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार राशिनुसार रुद्राक्ष पहनने के भी अपने कई लाभ है। रुद्राक्ष कई मुखी में आता है। जानें आपकी राशि के अनुसार आपके लिए बेस्ट कौन सा है। 

आद्यात्मिक और सामाजिक जानकारी के लिए अभी डाउनलोड करे : Rgyan APP

तीनमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिये। इसका संबंध अग्नि देव से है और इससे पिछले जन्म और इस जन्म के पापकर्मों से मुक्ति मिलती है इसके अलावा निगेटिव विचार, अपराध की भावना, हीन भावना आदि कम होते है और आपके व्यक्तित्व का विकास होता है। साथ ही इसे धारण करने से बीपी, कमज़ोरी और पेट संबंधी बीमारियों का भी उपचार होता है।

वृष राशि
छः मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है। छः मुखी रुद्राक्ष का सूचक शिवजी के पुत्र भगवान कार्तिकेय को माना जाता है और इससे बुद्धि का विकास होता है अभिव्यक्ति की कुशलता और इच्छा शक्ति बढ़ती है साथ ही इसे धारण करने से शौर्य एवं प्रेम की प्राप्ति होती है अगर औषधीय गुणों की बात करें तो इससे आंखो को फायदा होता है, मुंह और गले के रोगों के लिये भी छः मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होता है।

मिथुन राशि 
चतुर्मुखी यानि चार मुखी रुद्राक्ष धारण करना उत्तम है। चार मुखी रुद्राक्ष को ब्रम्हाजी का आशीर्वाद प्राप्त है। चतुर्मुखी रुद्राक्ष के धारण से मनुष्य को मेधावी आंखें प्राप्त होती हैं। साथ ही वह तेजस्वी होता है उसका मानसिक संतुलन अच्छा रहता है, वह तनाव, डिप्रेशन आदि से दूर रहता है और उसकी वाणी में मधुरता आती है।

कर्क राशि 
आपको दो मुखी रुद्राक्ष का धारण करना चाहिए। दो मुखी रुद्राक्ष को शिवजी के अर्धनारीश्वर यानि जिस रूप में शिव और शक्ति का सन्योग है, उनका वरदान प्राप्त है। पद्मपुराण के अनुसार दो मुखी रुद्राक्ष को अग्नि का वरदान भी प्राप्त है लिहाजा इसको धारण करने से धारक को यज्ञ, होम वा अग्निहोत्र से मिलने वालें पुण्य प्राप्त होताहै । साथ ही यह अच्छे पारिवारिक जीवन, सभी से अच्छे संबंध और विवाह सिद्धि के लिये उपयोगी है।

सिंह राशि 
बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। बारह मुखी रुद्राक्ष को सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त है। इसे द्वादश आदित्य भी कहते है। इसे धारण करने से किसी भी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को निर्भय एवं निस्संकट बनाता है। धारक का आर्थिक पक्ष मजबूत होता है और उसे गरीबी कभी नहीं सताती। साथ ही बारह मुखी रुद्राक्ष से हृदय, त्वचा और आंखों के रोगों का उपचार भी होता है।

कन्या राशि 
एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना उत्तम होता है। एकमुखी रुद्राक्ष सबसे शुभ होता है। इस रुद्राक्ष को स्वयं शिवजी का वरदान प्राप्त है। यह बीज परम सुख और मोक्ष दिलाता है । कहा जाता है जिस जगह पर एक मुखी रुद्राक्ष की पूजा होती है वहां लक्ष्मी जी निवास करती है, एक मुखी रुद्राक्ष ऋद्धि और सिद्धि दोनों दिलाता है। साथ ही यह रुद्राक्ष अपने धारक को एकाग्रता, मन की शांति प्रदान कराता है और उसकी सारी इच्छाओं को पूर्ण करता है।

तुला राशि 
आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है। आठ मुखी रुद्राक्ष को गणेश भगवान , जो कि संकटों के निवारक है, उनका वरदान प्राप्त है। आठ मुखी रुद्राक्ष बुद्धि का विकास, सर्कुलेशन की शक्ति और राइटिंग स्कील प्रदान करता है। साथ ही इससे यश , कला में निपुणता एवं समृद्धि प्राप्त होता है। और वैद्यकीय गुणों की बात करें तो इससे नाड़ी संबंधित , शयान यानि प्रोस्ट्रेट और गॉल ब्लैडर के रोग मिटते है।

वृश्चिक राशि 
पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। पञ्चमुखी रुद्राक्ष को शिवजी के कालाग्नि रुद्र रूप का वरदान मिला हुआ है। मान्यता है कि तीन बड़े पञ्चमुखी रुद्राक्ष पहनने से अकाल मृत्यु भी टल जाती है साथ ही तन और मन कि शुद्धि होती है। और जहां तक इसके औषधीय गुणों का सवाल है, यह  बी.पी, डायबिटीज, कान, पेट और जंघा के रोगों को नियंत्रण करने के लिए काफी प्रचलित
है।

धनु राशि 
नवमुखी यानि नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करना अतिशुभ है। नौ मुखी रुद्राक्ष को देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति निर्भय और तनावमुक्त होता है। और इसको पहनने से व्यक्ति के अंतर्मन की पवित्र अग्नि द्वारा शुद्धि होती है। साथ ही यह अपने धारक को बलशाली और आत्म विश्वासी बनाता है। मान्यता है कि काल यानि यमराज और काल भैरव दोनों ही नवमुखी रुद्राक्ष के धारक की रक्षा करते है। जिस कारण इसे कालभय निवारक भी कहते है।

मकर राशि
दस मुखी रुद्राक्ष उत्तम माना जाता है। इस रुद्राक्ष को भगवान विष्णु का वरदान प्राप्त है। इसे पूजा मे रखकर हरि और हर दोनों की
कृपा प्राप्त की जा सकती है। और दो महान देवताओं की शक्तियों को जोड़कर भूत, जादू-टोना, ईर्ष्या आदि संकटों से मुक्ति दिलाता है। साथ ही घर, कार्यालय या कारखानों के वास्तुदोष भी इससे मिटते है।इसके अलावा मुकदमा, कलह और शत्रु उपद्रव होने पर यह बीज बहुत सहायक है। कहा जाता है कि सभी ग्रहों के नियंत्रण के उपर यह पहला रुद्राक्ष है, लिहाजा किसी भी ग्रह के बुरे प्रकोप से बचने के लिये यह रुद्राक्ष प्रभावी है।

कुंभ राशि 
सात मुखी रुद्राक्ष का धारण करना चाहिए। यह रुद्राक्ष सात मातृकाओं के साथ ही सूर्य, सप्तर्षि कार्तिकेय, अंगत यानि कामदेव, अनंत यानि बासुकी, और नागराज को समर्पित है। सप्तमातृकाएं यानि ब्राम्ही, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी और चामुंडा को समर्पित होने से यह महालक्ष्मी को प्रसन्न करता है। जिस कारण इसको धारण करने वाले के जीवन में प्रगति , कीर्ति, और धन कि वर्षा कराता है और धारक के दुर्भाग्य को मिटाता है। साथ ही इसके धारण करने वाले को गुप्त धन और जीवन में भरपूर रोमांस मिलता है। और शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है।

मीन राशि 
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना अतिशुभ माना जाता है। एकादशमुखी अथवा ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को हनुमानजी की कृपा प्राप्त है। एकादशमुखी रुद्राक्ष के धारक को हनुमान जी जैसे गुण प्राप्त होते है, जैसे बात करने की कुशलता, आत्मविश्वास, तेज बुद्धि , शारीरिक बल आदि। योग और तंत्र से जुड़े व्यक्तिओं के लिये भी यह बहुत लाभकारी है। साथ ही यह रुद्राक्ष रक्षा प्रदान करता है। औषधि के रूप में यह दिव्य बीज पेट, हृदय, लिवर, संबंधी रोगों के उपचार में सहायक होगा।