World Ozone Day 2020: जानें 16 सितंबर को क्यों मनाते हैं विश्व ओजोन दिवस, साथ ही जानिए इस साल की थीम

ओजोन परत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिएहर साल 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है। ओजोन परत हमारी जिदंगी का एक अहम हिस्सा है। कह सकते हैं कि शायद इसके बिना प्रथ्वी में जीना मुश्किल है। यह सूर्य से निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावाइलट किरणों से प्रथ्वी को बचाती है। जिससे आप स्किन सहित कई खतरनाक बीमारियों से बच जाते हैं। जानिए कब से हुई विश्व ओजोन दिवस की शुरुआत, थीम।

क्या है ओजोन परत

ओजोन हमारे वायुमंडल का बाहरी आवरण है जो ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनी है। जो प्रथ्वी को सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरणों से बचाता है।

ओजोन दिवस की थीम

ओजोन परत को महत्व को जानते हुए इस बार कुछ अलग ही थीम रखी गई है। जो ओजोन के संरक्षण को लेकर है। इस बार की थीम है – ‘जीवन के लिए ओजोनः ओजोन परत संरक्षण के 35 साल’ (Ozone for life: 35 years of ozone layer protection)। आपको बता दें कि वैश्विक ओजोन परत संरक्षण के 35 साल मना रहे हैं।

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कैसे हुए ओजोन डे की शुरुआत

पहली बार ओजोन डे साल 1995 में मनाया गया था। साल 1970 में वैज्ञानिकों को ओजोन परत के छेदों के बारे में पता टला। जिसके बाद विश्व के कई देशों की सरकार के लिए यह चिंता का विषय बन गया। 16 सितंबर, 1987 को संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में ओजोन छिद्र से उत्पन्न चिंता के निवारण के लिए कनाडा के मांट्रियल शहर में दुनिया के 33 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे ‘मांट्रियल प्रोटोकॉल’ कहा जाता है। इसकी शुरुआत एक जनवरी, 1989 को हुई। इस प्रोटोकॉल का लक्ष्य है कि साल 2050 तक ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल को कंट्रोल किया जाए। ओजोन परत को सबसे ज्यादा नुकसान क्लोरो फ्लोरो कार्बन (सीएफसी) के कारण हो रहा है। जिसे कम इस्तेमाल करना था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ जिसके कारण कई हानिकारक प्रभाव सामने आए। इसके बाद 19 दिसंबर, 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 16 सितंबर को ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया।

ओजोन परत के रोचक तथ्य

ओजोन परत तेज बदबूदार नीले रंग की गैस है।
साल 1840 में ओजोन की खोज क्रिस्चियन फ्रेड्रिच स्कोनबे ने की थी। उन्होंने ग्रीक नाम पर ओजोन नाम दिया।
ओजोन परत धरती से 12-20 मील ऊपर है।
साल 1985 में अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में छेद के बारे में पता लगाया गया था। हालांकि सीएफसी केमिकल पर बैन लगाने से इसे ठीक कर लिया गया था।
अंटार्कटिका में खोजा गया छेद 29 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक था जोकि रूस और कनाडा के संयुक्त रूप से बड़ा है!
आपको बता दें कि सीएफसी का उपयोग रेफ्रिजरेंट और कूलिंग यूनिट के अलावा अग्निशामक और एयरोसोल्स में किया जा रहा था।

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