गाय की पूजा के इतने हैं फायदे, यूं ही नहीं कहते माता

पुराण, उपन‍िषद ही नहीं वास्‍तु ने भी माना

गाय को हिंदू धर्म शास्‍त्रों में माता का स्‍थान द‍िया गया है। इसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। पुराणों और उपन‍िषदों में भी गौ माता की सेवा को सर्वोपर‍ि बताया गया है। वास्‍तु शास्‍त्र भी इसकी पैरवी करता है। इसके अनुसार गाय माता की यद‍ि सेवा की जाए तो वास्‍तु संबंध‍ित कई परेशान‍ियां आसानी से हल हो सकती हैं। लेकिन इसके लिए कुछ न‍ियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं वह कौन से न‍ियम हैं और उनके पालन से जीवन में कौन सी खुशी आती है….

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ऐसे करनी चाहिए शुरुआत

यदि आप वास्‍तु दोष के चलते दांपत्‍य जीवन में कष्‍ट या फिर संतानहीनता की समस्‍या से जूझ रहे हैं। तो सबसे पहले घर में एक गाय ले आएं। इसके बाद कोई भी शुभ कार्य करें मसलन पूजा-पाठ, जन्‍मदिन या शादी की सालगिरह। सबसे पहले गाय माता की पूजा करें। गोबर गी गौर बनाकर उसका भी पूजन करें। इससे वास्‍तु दोष दूर होता है और दांपत्‍य जीवन सुखमय होता है और संतान प्राप्ति की कामना भी पूरी होती है।

ऐसा करना कभी भी न भूलें

वास्‍तु के मुताब‍िक आपने घर में गाय पाली हो या न पाली हो लेकिन वास्‍तु दोष सही करने के लिए आप उन्‍हें न‍ियम‍ित रूप से रोटी जरूर खिलाएं। ध्‍यान रखें जब भी भोजन बनाएं तो एक साफ प्‍लेट में पहली रोटी और उसके ऊपर सब्‍जी रखकर उसे प्रणाम करके अलग रख दें। इसके बाद अगर घर में गाय हो तो उसे खिला दें अन्‍यथा बाहर जो भी गाय द‍िखे उसे ख‍िलाएं। वास्‍तु कहता है कि स्‍वयं के भोजन से पूर्व गाय को इस तरह से रोटी ख‍िलाने से सारे वास्‍तु दोष दूर हो जाते हैं।

गाय के दूध से ही बनाएं इसे

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार घर में जब भी पूजा-पाठ या शुभ कार्यों का आयोजन करें तो उसमें गाय के दूध का ही पंचामृत बनाएं। मान्‍यता है कि इससे भी वास्‍तु दोष दूर होते हैं। अगर आपने गाय को घर में रखा है तो उसके लिए गौशाला बनवाना चाहिए। साथ ही यह भी ध्‍यान रखना चाहिए कि गौशाला की दीवार घर से सटी हुई हो। वास्‍तु कहता है कि घर के निकट बंधी गाय सभी के दोषों और उनसे होने वाले व‍िकारों को दूर करती है।

तो इसे भी रख सकते हैं

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार अगर गाय को पालने में सक्षम नहीं है या आपके पास जगह का अभाव है तो गाय का प्रतीक भी रख सकते हैं। लेकिन ध्‍यान रखें क‍ि इसे हमेशा दक्षिण-पूर्व द‍िशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से एकाग्रता में वृद्धि होती है और जातक की शिक्षा और व्‍यवसाय में वास्‍तु दोष के चलते आ रही सभी परेशान‍ियां एक-एक करके दूर होने लगती हैं।